1. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (बिहार)
👉 यह योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2025 में शुरू की है।
इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता देना है।
योजना के मुख्य बिंदु
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लाभार्थी : एक परिवार से केवल एक महिला को इसका लाभ मिलेगा।
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पहली किस्त : महिला के बैंक खाते में सीधे ₹10,000 की सहायता राशि दी जाएगी।
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अगली सहायता : 6 महीने बाद यदि वह महिला अपने काम/व्यवसाय को ठीक से चला रही है, तो उसे ₹2 लाख तक अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकती है।
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उद्देश्य :
- महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
- “हाट–बाज़ार” के माध्यम से उनके बनाए उत्पादों को बेचने का अवसर देना।
- परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना।
2. जीविका निधि (Jeevika Nidhi)
यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में शुरू की।
इसका उद्देश्य है कि जो महिलाएं SHG (Self-Help Group) / जीविका समूह से जुड़ी हैं, उन्हें उच्च ब्याज दर वाले कर्ज पर निर्भर न रहना पड़े।
योजना की खास बातें
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प्रारंभिक फंडिंग : ₹105 करोड़ की राशि सहकारी समितियों को दी गई।
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कैसे काम करेगी :
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महिला SHGs डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिये सीधे सस्ती ब्याज दर पर ऋण ले सकेंगी।
पैसा सीधे बैंक खाते में जाएगा, पारदर्शिता बनी रहेगी।
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उद्देश्य :
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ग्रामीण महिलाओं को सस्ती पूंजी उपलब्ध कराना।
उन्हें व्यवसाय और आय बढ़ाने के अवसर देना।
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3. पात्रता शर्तें (मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लिए)
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लाभार्थी बिहार की स्थायी निवासी महिला होनी चाहिए।
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उम्र आम तौर पर 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
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परिवार से केवल एक ही महिला इसका लाभ ले सकती है।
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बैंक खाता आधार से जुड़ा होना ज़रूरी है।
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प्राथमिकता जीविका समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को मिलेगी।
4. आवेदन प्रक्रिया (संभावित)
सरकार ने अभी ऑनलाइन पोर्टल और विस्तृत गाइडलाइन की घोषणा पूरी तरह नहीं की है, लेकिन सामान्य प्रक्रिया इस तरह होगी:
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आवेदन फॉर्म भरना – ऑनलाइन या ऑफलाइन (प्रखंड/ब्लॉक कार्यालय या जीविका समूह के माध्यम से)।
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दस्तावेज़ जमा करना :
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आधार कार्ड
बैंक पासबुक
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निवास प्रमाण पत्र
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फोटो
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जीविका समूह से जुड़ाव का प्रमाण (अगर है)
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जाँच (Verification) – प्रखंड स्तर पर।
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सहायता राशि ट्रांसफर – DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए महिला के बैंक खाते में।
5. लाभ
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महिलाओं को छोटे व्यवसाय (जैसे दुकान, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन आदि) शुरू करने के लिए पूंजी मिलेगी।
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आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
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SHG और जीविका समूहों की भूमिका और मज़बूत होगी।


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